गुरुवार, 3 दिसंबर 2009

दोस्ती

रिश्तों की कभी दिल में गर कोई गरज नहीं होती...
दोस्ती मुश्किल भी नहीं और भी सहज नहीं होती...
निभा सको तो शुक्र है वर्ना राहें हो जाती हैं गमजदा,क्यूंकि,
दोस्ती रुक-रुक कर चलने वाली कोई नब्ज़ नहीं होती....!

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपने बिल्कुल सही कहा है! दोस्ती ऐसा हो जिसमें सच्चाई हो और आखरी दम तक उसे निभाया जा सके!

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--धन्यवाद !