रविवार, 4 अप्रैल 2010






नज़र को तो तेरी नज़रों के नजराने की चाहत है,
तेरे लब से मुझे बस मुस्कुरा लेने की चाहत है,
कि अब उम्मीद है इतनी मेरे टूटे हुए दिल में,
अब इन अश्कों को किश्तों में लुटा देने की चाहत है...!

4 टिप्‍पणियां:

  1. "Simte Lamhen" is blog pe aapne badihi sundar panktiyan, tippanee ke roopme likhin hain! Bahut,bahut shukriya!

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  2. Its really nice!!!!!
    lagta hai aap apne dil ko hi nikal kar rakh diye hain .......

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  3. bhai,
    adbhut sabd hai tere,ki in sabdo pe mar jaayein..
    magar ek baar kavi champak ko,gale lagaane ki chahat hai...

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ब्लॉग पर आने के लिए और अपने अमूल्य विचार व्यक्त करने के लिए चम्पक की और से आपको बहुत बहुत धन्यवाद .आप यहाँ अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर हमें अपनी भावनाओं से अवगत करा सकते हैं ,और इसके लिए चम्पक आपका सदा आभारी रहेगा .

--धन्यवाद !