शनिवार, 27 फ़रवरी 2010

तेरी हया



तेरी ज़ालिम अदाओं ने मुझे हर बार मारा है..
कभी थोड़ी हया से तो कभी बेबाक मारा है..
मेरे आंसू तेरी आँखों के शीतल नाज़ बन जाते,
मगर उनको तेरी नफरत ने तो बिंदास मारा है..!

3 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छा । सुन्दर प्रयास है। जारी रखिये ।

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  2. आपको और आपके परिवार को होली पर्व की हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनायें!

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ब्लॉग पर आने के लिए और अपने अमूल्य विचार व्यक्त करने के लिए चम्पक की और से आपको बहुत बहुत धन्यवाद .आप यहाँ अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर हमें अपनी भावनाओं से अवगत करा सकते हैं ,और इसके लिए चम्पक आपका सदा आभारी रहेगा .

--धन्यवाद !